Monday, August 11, 2008

जीत लिया सोना


आखिर कर २८ सालों बाद हमने सोना जीत ही लिया। इससे पहले १९८० में मोस्को में हॉकी ने हमें सोना दिलाया था। उस तारीख से कल की तारीख तक एक अरब का यह देश सोने के लिए तरसता रहा था। इस से पहले लिएंडर पेस उसके बाद कर्लुम्माहेस्वारी और पिछले ओलंपिक में राजवर्धन राठोड़ ने कांसा और चांदी का तमगा दिलवाया और किसी तरह लाज रखी। मजे की बात यह है की ११२ साल के ओलंपिक के इतिहास में किसी भारतीय ने पहली बार व्यक्तिगत स्पर्द्धा में सोना जीता है। सरकार इस जीत का सेहरा अपने सर बांधेगी। और सुरेश कलमंडी ( ओलम्पिक सिर्वेसर्वा) इसको अपने प्रयसों का प्रतिफल बतायेंगे ।
लेकिन क्या आप जानते है ? ये सोना कैसे मिला?
थोड़ा इस बारे में जानते हैं।
अभिनव के पिता उद्योगपति है और उन्होंने शूटिंग जैसे मंहगे खेल के लिए अभिनव के ऊपर पुरे पांच करोड़ खर्च किए और प्रक्टिस के लिए घर में ही शूटिंग रेंज बनवा दी. जो शायद हमारे देश का आम बाप अपने खिलाड़ी बच्चे पर नही कर पाएगा। मेरा यहाँ ये बात कहने का मतलब सिर्फ़ इतना है कि सरकार को यह ध्यान रखना चाहिए कि अगर ओलंपिक जैसी बड़ी खेल प्रतियोगिता में तम्गन जीतना है तो प्रतिभावान खिलाडियों को ऐसी सुविधा उनके आस-पास के खेल मैदानों तक पुहुचानी चाहिये। जिस तरह अभिनव को राज्य सरकारें इनाम देने की घोषणा कर रही है। ऐसे ही घोषणा सहर कस्बों के खिलाड़ियों के लिए करनी चहियें ।

Saturday, August 9, 2008

दोस्तों की याद













बचपन के खेल वो दोस्तों का साथ
बागों से आम, अमरूदों की चोरी
वो लुका-छुपी और छुवन-छुवाई
पेड़ों पे चढ़ने की शर्तें लगाना।

स्कूल को बंक करके मूवी को जाना
एक्जाम टाइम पे नकल की तैयारी
वो क्लास में खूब धूम मचाना
वो चीखना-चिल्लाना गाने गाना।

साथ बैठ कर, कुछ करके दिखाने की बातें
वो एमबीए, सिविल को करने की प्लानिंग
सपनों को हर हाल में सच करने की जिद
वो कामयाबी के लिए जी थोड मेहनत।

वो बैठक, हँसी और ठहाकों के दिन
रूठना- मानना, लड़इयो के दिन
गम और खुशी हर पल में शामिल
हर शैतानी और कामयाबी में शामिल ।

आज फिर से वो मुझको याद आ रहे
मेरे पलकों को नमी दे जा रहे
है दुवा की रहो सब सलामत सदा
और जिंदगी में रहे खुशियाँ सदा।

मेरे दोस्तों तुमको सलाम ...................

Wednesday, August 6, 2008

न्यूज़ रूम का हाल

किस पेज पर कौन से लीड
कौन सा फोटो कहाँ लगे
केप्सन साला कहाँ गया
ये ही मारा- मारी रोज।

हेडिंग बदलो, फॉण्ट बदलो
त्रुटियों का रखो ध्यान
नही तो सम्पादक का डंडा
चलेगा अपनी पूरी शान।

शोर- शराबा गरम दिमाग
खबर को रोको खबर को छोड़ो
टी पर ३३ टी पर ३२
एडिट करो बस फिट करो।

भरत जी बस दस मिनट
हरीश जी टाइम का रखो ध्यान
डेड लाइन से पहले काम
डेथ लाइन के हा समान

ये मंत्र सिर्फ़ रखना याद
विज्ञापन को रखना साथ
विज्ञापन न जाने पाए
चाहे न्यूज़ भले ही जाए ।


Saturday, August 2, 2008

ये खूनी खेल


मौत के सौदागरों ने जयपुर के बाद बंगलौर और उसके तुरंत बाद अहमदाबाद को निशाना बनाया । वो कहते है की हमने अल्लाह के निर्देश से ये बदले की कार्यवाही की है। लेकिन कोई उनसे पूछे किस से बदला और कैसा बदला। बदला उनसे जो बीमार थे, जो सड़क के किनारे अपना ठेला लगा कर अपने गुजर-बसर के लिए रोजी - रोटी कमाते थे । या फिर उनसे जो दिन भर का काम खत्म कर अपने घरों को वापस जा रहे थे। इस के पीछे हाथ चाहे जिसका हो एक बात तो पक्की है वो न तो हिंदू है न मुसलमान।
जिस मकसद की वो बात करते है या अगर वो ये कहते है की हमने बदला लिया है तो ये सिर्फ उनका भ्रम है। किसी के सिर से माँ-बाप का साया, किसी के घर का चिराग, हाथों से राखी, मांग से सिंदूर और किसी से उजले भविष्य उम्मीदे छीन कर अगर वो कहते है की हमने बदला लिया है। तो ये कैसा बदला जिसमे इन्सान ही इंसानियत को खत्म कर रहा है बदले के नाम पर।
अरे कातिलों ये बात समझो की आंख के बदले आंख पुरी दुनिया को अँधा कर देगी। इस से पहले की सारी दुनीया अंधी हो ये खूनी खेल बंद करो ....... बंद करो .....बंद करो ...........

Saturday, July 12, 2008

राजनीति का नाटक


आखिर कर वाम दलों ने समर्थन वापस ले लिया। जो सबसे अचरज की बात रही, वो थी समाजवादी पार्टी का कांग्रेस को समर्थन, ये वही समाजवादी पार्टी है जिसके नेतृत्व में तीसरे मोर्चे का गठन हुआ था। और जो सभों में भाजपा और कांग्रेस दोनों को कोसते थे। आज वो सांप्रदायिक ताकतों के विरुद्ध कांग्रेस को मजबूत कर रहे है। अगर भाजपा को हटा दे तो बाकि बची पार्टियां जिनका वो विरोध कर रहे है कभी उनके साथ गलबहियां कर रहे थे। ये है अवसरवादी राजनीति का लाजवाब उदाहरण और मुहावरे को चरितार्थ करता प्रकरण की राजनीति में न कोई स्थायी दोस्त होता है न दुश्मन । कांग्रेस और भाजपा का विकल्प की बात करने वाले तीसरे मोर्चे के नेता अब मजाक से लगते है।

Wednesday, July 9, 2008

कन्या भ्रूण की माँ से विनती

माँ तेरी ममता की परीछा
आज ये बेटी लेती है,
कोख में हूँ, मजबूर हूँ मै
पर आज ये तुमसे कहती हूँ।
तेरे जिगर का टुकडा हूँ मै
मुझे तुछ पर विस्वास है
तू समझेगी मेरी व्यथा बस
मुझको पुरी आस है।
चाहे कोई तुझको समझाए
या मेरे विरोध में भड़काए
पर अपना बंधन मजबूत हो इतना
की कोई हमको जुदा न कर।
माँ तू माँ है, अपनी
अपनी ममता पर वार न होने देना
इस बेटी को दुनिया में न लाकर,
बेटी को बादनाम न होने देना।
दुनिया को दिखा देना की
माँ बेटी का रिश्ता कितना प्यारा है
संदेश मिले हर माँ को ये की
"बेटी सबका सहारा है"

Tuesday, July 1, 2008

फ़ेल किया चार लाख बच्चों को

राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने चार लाख बच्चों को फ़ेल कर दिया। अब आप सहज ही अंदाजा लगा सकते है की राज्य में शिक्षा का क्या स्तर है।