Wednesday, September 3, 2008

दिल-ही-दिल में

मोहब्बत भी क्या चीज है
आँखों से शुरू होकर दिल में उतर जाती है।
साला आदमी की जान पर बन आती है।
खता आँखे करे भुगतना दिल, जीगर, किडनी को पड़े।

अगर वो हां करे तो समझो साला जान गई।
अगर वो ना करे तो सारी दुनिया जान गई
इस खतरनाक बीमारी को जो पालता है
दारू, गांजा, भांग, में शुकून पाता है।

धीरे-धीरे ये बीमारी स्वर्ग पहुंचती है
स्सला भरी जवानी में मोक्छ दिलवाती है
दिल के दौरे से भी चूक हो जाती है
लेकिन ये बीमारी जान लेकर जाती है।

कवियों, शयरों, गीतकारों ने हजारों टन रद्दी
मोहब्बत के फसाने लिखकर बर्बाद की है
इन मोहब्बत पसंद लोगों ने ही मयखानों
नाच- गानों के कल कारखानों को इज्जत दी है

कुछ भी हो मोहब्बत चीज है कमाल की
हो जाए तो मजा आ जाता है
स्साला दिन में तारों की तो बात छोड़ो
पुरा चाँद मय चांदनी नजर आता है।

बागों में भवरें, पतझड़ में सावन
रेगिस्तान समुंदर नजर आता हैं
दिल की धडकनों का न हाल पूछो साहब
चरों वोर सिर्फ़ महबूब नजर आता है

इसी लिए कहता हूं साहब
मोहब्बत, अमन- चैन का नगमा गावो
मुहब्बत करो इसे न भुलावो ...............


Thursday, August 28, 2008

अकेला हूँ

अकेला हूँ अपनों के बीच में

अपने लगते है पराये से

कमी कुछ नही है जीवन में

पर क्यों लगता है कुछ नही है पास में

जीत लेने को है अनंत आकाश

बाहें फैलाय कामयाबी बुलाती है

पर नही बड़ते कदम उसका आलिंगन करने को

सोचता हूँ ये कामयाबी क्या देगी मुझे

समाज में नाम, परिवार और प्रतिष्ठा

इक बनावाटी जिन्दगी, इक झूटी शान

नही चाहिए ये दायरे की जिंदगी

जिसमे सब बन्धनों में बंधा हो

जिसमे हर तरफ लक्ष्मन रेखा हो..........

Tuesday, August 26, 2008

परेशान हूँ मैं

कुछ दिनों से बड़ा परेशान हूँ मैं
कुछ लिखना चाहता हूँ पर लिख नहीं पाता हूँ ।

सोचता हूँ पर सोच नही पाता हूँ
विचारों ने भी दामन छोड़ दिया है।

शब्दों ने आकार लेना बंद कर दिया है
ऐसा लगता है अभिव्यक्ति अब मुश्किल है।

बस संस्थान के निर्देशों पर इस कलम को चलाना है ।
आगे का जीवन कलम की दलाली करके बिताना है ।

सोचता हूँ छोड़ दूँ इस बंधुवा कलम को
लेकिन............................................

Saturday, August 23, 2008

कृष्ण दीवानी ..........

तेरी बातें बड़ी सुहानी
कभी सूनी न ऐसी कहानी
भई बेगानी, कृष्ण दीवानी !

द्वरिका में राधा गोपी
घट घट घूमें वो तो जोगी
भई बेगानी, कृष्ण दीवानी !

श्याम से उसने लगन लगाई
सब के मन में जोत जगाई
भई बेगानी, कृष्ण दीवानी !

धड़कन बोले गिरधर-गिरधर
मन में शमाए कितने मंजर
भई बेगानी, कृष्ण दीवानी !

ऐसी भक्ति, ऐसी पूजा
देखा नहीं है कोई दूजा
भई बेगानी, कृष्ण दीवानी !

जप कर तेरे नाम की माला
रास का हाला विष का प्याला
भई बेगानी, कृष्ण दीवानी !

दर्शन दर्शन अँखियाँ तरसे
गिरधर तेरी मेहर को तरसे
भई बेगानी, कृष्ण दीवानी !

ज़ाहिर सर की कलम से
सृजन रात १२.२७ से १२.30

Thursday, August 21, 2008

शबाना को मुश्किल से मिला फ्लैट

अभी १७ तारीख को हिन्दुस्तान समाचार पत्र के फ्रंट पेज पर खबर थी। उसमें शबाना आजमी ने सी.एन.एन -आई बी एन के इक कार्यक्रम में बताया कि मुसलमान होने के कारण उन्हें मुंबई में फ्लैट खरीदने में दिक्कत हुई। इसी से मिलाती-जुलती कहानी सैफ अली खान की भी थी। ये तो हुई नामचीन लोगो की बात, अब मै बताता हूँ कि इक मेरे सहकर्मी भी इसी समस्या से दो चार हुए, गुनाह सिर्फ़ इतना कि वो भी मुसलमान थे। कुछ इसी तरह कि समस्या दलित और आदिवासियों लोगों के साथ भी होती है। तीनो का कुसूर सिर्फ़ और सिर्फ़ इतना होता है कि इक समाज के सबसे नीचे पायदान का होता है। जिसे सभ्य समाज गन्दा और अपने साथ में बैठने के काबिल नही समझता दूसरा अघोषित आतंकवादी है। और तीसरे का तो निवास स्थान ही जंगल है तो उसका शहर और कस्बों में क्या काम?
अगर बात मुसलमानों कि करें तो पश्चिम के कुछ देश जिनमे अमेरिका अग्रणी है, ने सारी दुनिया के मुसलमानों को आतंकवादी बताने कि मुहीम चला रखी है। हम लोग भी अपने मुसलमान भाइयों को अमेरिका के चश्मे से देखते हैं। अभी हाल में बंगलोर और अहमदाबाद में बम धमाके हुए। पुलिस ने तफ्तीश की और कुछ लोगो को पकड़ा जो की इक खास धर्म की वेश-भूषा के थे। अभी उन पर आरोप सिद्ध भी नही हुए हैं। लेकिन मीडिया वालों ने उनको आतंकवादी घोषित कर दिया। हो सकता है की उनमें से कुछ अपराधी हों लेकिन क्या कभी आपने ये सोचा है की हर आतंकवादी घटना के बाद इक ही धर्म के लोग क्यों पकड़े जाते है? घटना के कुछ समय के बाद ही पुलिस केस को हल केसे कर लेती है? केसे वो मुतभेड में अपराधी को मार गिराती है? अगर उसका नेटवर्क इतना ही तेज है तो वो घटना होने से पहेले ही केवों पता नही लगा लेती?

Thursday, August 14, 2008

अभिनव इंडिया, अनुपम इंडिया, अद्वितीय इंडिया

१०८ साल
बात वो बहुत पुरानी है।
आज ये नई कहानी है॥
साथ सारा देश है तेरे।
और सारी दुनिया दीवानी है॥

मिल्खासिंह और मल्लेस्वरी का रुदन है
और पीटी उषा का भी करुण क्रंदन है
सत्य, अहिंषा, संयम व सदभावना के संग
खुशियों से झूमते सारे देश का वंदन है

आतंकवाद के दौर में
अमरनाथ के शोर में
काल के कपाल पर
आँख की भी ताल पर

ये सुहानी रात है
इक नई सी बात है
झूमती है कामधेनु
जबरदस्त मात है

उड़ गया झू हो गया छू
सुनहरा हार है रूबरू
पल्झिनो का साथ है
क्या कमाल हाथ है।

हर तरफ है इक उमंग
बज रही है जलतरंग
बजा चीन में जन गन मन
नाच उठा है ये तन मन

जान ले ये बेखबर !
हाथ में है ये नजर!
खामोशी को चीर कर
आया है ये समर
जीत चुका है वो समर।

ऍम. आई जाहिर सर की कलम से ...........